Friday, October 7, 2011

युवा संभालेंगे संघर्ष की डोर


जम्मू। वादी में कश्मीरी पंडितों के लिए अलग होमलैंड की मांग करने वाले संगठन पनुन कश्मीर ने इस संघर्ष में नई जान फूंकने के लिए युवाओं के हाथ में बागडोर सौंपने का मन बनाया है। अश्विनी चरंगू के नेतृत्व में बीस वर्ष से मार्गदर्शन प्रस्ताव के तहत जारी इस संघर्ष को नई दिशा देने के लिए पनुन कश्मीर ने युवा इकाई का पुनर्गठन किया है। नई इकाई के कंवीनर समीर भट्ट बनाए गए हैं। मार्गदर्शन प्रस्ताव 28 दिसंबर 1990 में पारित किया गया था। संगठन का शीर्ष नेतृत्व इस बात पर ध्यान दे रहा है कि होमलैंड की मांग के लिए सिर्फ कश्मीरी पंडित समुदाय ही संघर्ष नहीं करेगा, बल्कि समूचे देशवासियों को सहयोग देना होगा। संगठन के प्रधान अश्विनी चरंगू ने कहा कि कश्मीर में होमलैंड की मांग पूरी होने की संभावना और तीव्र हो सकती है, जब समूचा देश केंद्र सरकार को मांग मनवाने के लिए मजबूर करेगा। चरंगू ने कहा कि इसके लिए पनुन कश्मीर ने पहले भी तीन चरणों में संकल्प यात्रा पूरा किया और देशवासियों को कश्मीर की सही स्थिति के बारे में अवगत करवाया है। उनका मानना है कि यह पनुन कश्मीर के प्रयत्नों का ही नतीजा है कि आज देश के कई भागों में लोग कश्मीरी पंडितों के लिए वादी में होमलैंड की मांग का समर्थन करते हैं। उन्होंने बताया कि 24 से 28 दिसंबर तक युवाओं के लिए सम्मेलन किया जा रहा है, जिसमें देश के कई भागों से युवा भाग लेंगे। सम्मेलन को संभालने की जिम्मेवारी अमित कौल को दी गई है। किश्तवाड़ के विनीत ठाकुर भी उन्हें सहयोग देंगे। गौरतलब है कि देशवासियों को कश्मीर की वास्तविक स्थिति से अवगत करवाने के लिए चरंगू ने नौ राज्यों की यात्रा की है। इस समय भी वह बेंगलूरु, मंगलोर, जलगांव और औरंगाबाद की पंद्रह दिन की यात्रा पर हैं।

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