Saturday, September 24, 2011

नेहरू ने करवाया था कश्मीर में तख्तापलट


नेहरू ने करवाया था कश्मीर में तख्तापलट
नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर रियासत के अंतिम महाराजा हरि सिंह के पुत्र एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डॉ. कर्ण सिंह ने देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की कश्मीर नीति पर सीधे सवाल खड़े कर दिए हैं।

डॉ. सिंह ने नेहरू पर अपने पिता हरि सिंह के तख्तापलट में शेख अब्दुल्ला की मदद करने का सीधा आरोप लगाया है और कहा कि अगर हरि सिंह ने अपनी चुप्पी तोड़ दी होती तो नेहरू सरकार को गंभीर शर्मिंदगी उठानी पड़ सकती थी।

विभाजन के दौरान जम्मू-कश्मीर की राजनीति में पंडित नेहरू की भूमिका को लेकर यह सवाल उन्होंने “महाराजा हरि सिंह : दि ट्रबल्ड इयर्स” नामक पुस्तक की भूमिका लिखते हुए उठाए हैं। इसके लेखक हरबंस सिंह हैं। ध्यातव्य है कि 23 सितम्बर को महाराजा हरि सिंह का 116वां जन्म दिवस है। इससे दो दिन पहले नई दिल्ली में डॉ. सिंह ने ही इस पुस्तक का विमोचन भी किया है।

मंच पर डॉ. कर्ण सिंह, हरबंस सिंह व अन्य
पुस्तक की भूमिका में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डॉ. सिंह ने साफ तौर पर कहा है कि उनके पिता हरि सिंह को शेख अब्दुल्ला ने नेहरू के आशीर्वाद से ही सत्ता से बेदखल किया था।

डॉ. सिंह ने लिखा है कि भारत-पाकिस्तान के संदर्भ में हरि सिंह ने बेहतर समझौते की पेशकश की थी, मगर शेख अब्दुल्ला नेहरू के आशीर्वाद से मौके का फायदा उठाते हुए महाराज को सत्ता से हटा कर खुद जम गए। अब्दुल्ला को उन्होंने वर्ष 1931 से ही डोगरा विरोधी मुहिम चलाने का भी दोषी बताया। लेखक हरबंस सिंह ने भी पुस्तक में लगभग ऐसी ही बातें लिखी हैं।

विमोचन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि अगर हरि सिंह और शेख अब्दुल्ला के बीच समझौता हो गया होता तो राज्य ही नहीं पूरे भारतीय उप-महाद्वीप का इतिहास कुछ और ही होता। उन्होंने कहा कि इस सब के बावजूद हरि सिंह ने अपनी चुप्पी नहीं तोड़ी।

ज्ञातव्य है कि डॉ. सिंह राज्यसभा सांसद एवं कांग्रेस की विदेश नीति के प्रभारी भी हैं। वह वर्ष 1967 में स्वतंत्र भारत की चौथी लोकसभा में पर्यटन मंत्री बनने के बाद से स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। 80 वर्षीय डॉ. सिंह कांग्रेस के सबसे अनुभवी नेता माने जाते हैं।

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