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Monday, April 9, 2012

पंडितों ने धर्मस्थल बिल पास करने की मांग की

नई दिल्ली। आतंकवाद की चपेट में आकर कश्मीर घाटी से पलायन कर चुके पंडितों ने राज्य में मंदिर और धर्मस्थल विधेयक को जल्दी पास करवाने की मांग की है। इनका कहना है कि राज्य में अब भी सरकार के साथ मिलीभगत से मंदिरों की जमीन पर गैरकानूनी कब्जा जारी है। घाटी के पंडितों की ओर से सर्वदलीय शरणार्थी संयोजन समिति (ऑल पार्टी माईग्रेंट्स कोऑडिनेशन कमेटी, एपीएमसीसी) ने कश्मीर की मंदिर की भूमि पर लगातार हो रहे गैरकानूनी कब्जे के विरोध में प्रदर्शन आयोजित किया। समिति का कहना है कि एक तरफ राज्य सरकार दावा कर रही है कि वह कश्मीरी पंडितों की वापसी के कदम उठा रही है, मगर हकीकत यह है कि राज्य सरकार जानबूझ कर मंदिरों की जमीन पर कब्जा होने दे रही है। इस पूरे मामले में बड़े घोटाले की आशंका जताते हुए इसने मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआइ) से जांच करवाने की मांग की है। समिति ने मांग की है कि जम्मू-कश्मीर विधानसभा में जल्दी से जल्दी मंदिर व अन्य धर्मस्थल विधेयक पारित करवाया जाए। इसके बिना घाटी में पंडितों की वापसी मुमकिन नहीं। (9/4/2012)

Tuesday, November 22, 2011

मुफ्ती से मिला पंडितों का प्रतिनिधिमंडल


जम्मू। नगरोटा व जगटी में रहने वाले कश्मीरी पंडितों का एक प्रतिनिधिमंडल सोमवार को अशोक भट्ट के नेतृत्व में पूर्व मुख्यमंत्री व पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के संरक्षक मुफ्ती मुहम्मद सईद से मिला और उन्हें अपनी समस्याओं के बारे में बताया। प्रतिनिधिमंडल ने पीडीपी संरक्षक से कहा कि जगटी में रहने वाले निवासियों को बिजली की समस्या से जूझना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि बिजली विभाग के अधिकारी उनसे बिजली का किराया भी वसूल रहे हैं जबकि उन्होंने कैंपों में रहते हुए कभी भी बिजली का किराया नहीं दिया था। प्रतिनिधिमंडल ने मुफ्ती से नगरोटा तथा जगटी टाउनशिप के लिए आठ बजे के बाद मेटाडोर सेवा शुरू कराने की अपील भी की। मुफ्ती मुहम्मद सईद ने प्रतिनिधिमंडल की समस्याओं को ध्यान से सुना।

Tuesday, October 11, 2011

अब ऑल पार्टीज हिंदू कोआर्डिनेशन कमेटी बनी


जम्मू। हिंदुओं की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में बरती जा रही लापरवाही व अन्य मांगों को लेकर आमरण अनशन पर बैठे ऑल पार्टीज माइग्रेंट्स कोआर्डिनेशन कमेटी (एपीएमसीसी) के चेयरमैन विनोद पंडित को समर्थन दे रहे संगठनों ने सरकार पर दबाव बनाने के लिए ऑल पार्टीज-हिंदू कोआर्डिनेशन (एपीएचसीसी) कमेटी का गठन किया है। एपीएचसीसी राज्य में विखंडित हो रहे सैकड़ों मंदिरों व धार्मिक स्थलों पर अवैध कब्जों की जांच तथा उनके संरक्षण के लिए श्राईन बोर्ड बनाने की मांग को लेकर आंदोलन जारी रखेगी। वहीं, आमरण अनशन पर बैठे एपीएमसीसी नेता की हालत दिन-व-दिन बिगड़ती जा रही है, लेकिन सरकार ने चुप्पी साध रखी है। अपनी मांगें मनवाने को अनशन पर बैठे विनोद पंडित को आर्शीवाद देने के लिए समुदाय के वयोवृद्ध नेता अमरनाथ वैष्णवी भी प्रेस क्लब धरनास्थल पर बैठे। उन्होंने सरकारी रवैये पर नाराजगी जताते हुए संवाददाताओं से कहा कि राज्य में खस्ताहाल मंदिरों की भूमि पर अवैध कब्जों तथा ब्रिकी की जांच किया जाना जरूरी है। आमरण अनशन पर बैठे विनोद पंडित का आज पांचवा दिन है, लेकिन सरकार की खामोशी बताती है कि दाल में कुछ काला है। उधर, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व पूर्व सांसद जनकराज गुप्ता ने एपीएमसीसी के छह मांगों के चार्टर ऑफ डिमांड को सही करार देते हुए कहा है कि वह सरकार के नोटिस में जरूर इस मुद्दे को लाएंगे।

Friday, October 7, 2011

युवा संभालेंगे संघर्ष की डोर


जम्मू। वादी में कश्मीरी पंडितों के लिए अलग होमलैंड की मांग करने वाले संगठन पनुन कश्मीर ने इस संघर्ष में नई जान फूंकने के लिए युवाओं के हाथ में बागडोर सौंपने का मन बनाया है। अश्विनी चरंगू के नेतृत्व में बीस वर्ष से मार्गदर्शन प्रस्ताव के तहत जारी इस संघर्ष को नई दिशा देने के लिए पनुन कश्मीर ने युवा इकाई का पुनर्गठन किया है। नई इकाई के कंवीनर समीर भट्ट बनाए गए हैं। मार्गदर्शन प्रस्ताव 28 दिसंबर 1990 में पारित किया गया था। संगठन का शीर्ष नेतृत्व इस बात पर ध्यान दे रहा है कि होमलैंड की मांग के लिए सिर्फ कश्मीरी पंडित समुदाय ही संघर्ष नहीं करेगा, बल्कि समूचे देशवासियों को सहयोग देना होगा। संगठन के प्रधान अश्विनी चरंगू ने कहा कि कश्मीर में होमलैंड की मांग पूरी होने की संभावना और तीव्र हो सकती है, जब समूचा देश केंद्र सरकार को मांग मनवाने के लिए मजबूर करेगा। चरंगू ने कहा कि इसके लिए पनुन कश्मीर ने पहले भी तीन चरणों में संकल्प यात्रा पूरा किया और देशवासियों को कश्मीर की सही स्थिति के बारे में अवगत करवाया है। उनका मानना है कि यह पनुन कश्मीर के प्रयत्नों का ही नतीजा है कि आज देश के कई भागों में लोग कश्मीरी पंडितों के लिए वादी में होमलैंड की मांग का समर्थन करते हैं। उन्होंने बताया कि 24 से 28 दिसंबर तक युवाओं के लिए सम्मेलन किया जा रहा है, जिसमें देश के कई भागों से युवा भाग लेंगे। सम्मेलन को संभालने की जिम्मेवारी अमित कौल को दी गई है। किश्तवाड़ के विनीत ठाकुर भी उन्हें सहयोग देंगे। गौरतलब है कि देशवासियों को कश्मीर की वास्तविक स्थिति से अवगत करवाने के लिए चरंगू ने नौ राज्यों की यात्रा की है। इस समय भी वह बेंगलूरु, मंगलोर, जलगांव और औरंगाबाद की पंद्रह दिन की यात्रा पर हैं।

सांस्कृतिक विरासत संरक्षित की जाए


जम्मू। राज्य के तीनों संभाग की सियासत में भले ही भिन्न-भिन्न सुरों का संगम हो, लेकिन सांस्कृतिक विरासत संरक्षण के मुद्दे ने तीनों संभाग के लोगों की राय एक कर दी है। राज्य की समग्र संस्कृति का प्रतीक जम्मू व कश्मीर के धार्मिक स्थलों के साथ लगती भूमि पर हुए अवैध कब्जों की जांच, शारदापीठ श्राइन के दर्शनों के लिए आवाजाही की अनुमति व अन्य मांगों को लेकर छेड़े जाने वाले संघर्ष में आल पार्टीज माइग्रेंट्स कोआर्डिनेशन कमेटी (एपीएमसीसी) ने जम्मू संभाग के मंदिरों की बदहाली और उनकी जमीनों पर हुए कब्जों की जांच की मांग को भी अपने एजेंडे में शामिल कर लिया है। कमेटी लद्दाख के धार्मिक स्थलों को भी अपने एजेंडे में शामिल कर रही है, ताकि राज्यवासियों की धार्मिक व सांस्कृतिक आस्था के प्रतीक विरासत स्थलों को सहेजने में सरकार का ध्यान दिलाया जा सके। इस मुद्दे पर कमेटी के प्रधान विनोद पंडित शुक्रवार से प्रेस क्लब परिसर में आमरण अनशन पर बैठेंगे। उन्होंने बतया कि सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए उनकी जद्दोजहद तब तक जारी रहेगी जब तक उनको संरक्षित नहीं किया जाता। आंदोलन पर नजर रखने के लिए विभिन्न संगठनों के सदस्यों की कोर कमेटी भी गठित की गई है।

Monday, September 5, 2011

होमलैंड के मुद्दे पर तुरंत बात करे केंद्र


जम्मू। कश्मीरी पंडितों की वापसी को लेकर केंद्र सरकार को तुरंत पनुन कश्मीर के साथ वादी में होमलैंड के मुद्दे पर बातचीत करना चाहिए। शनिवार को जिस एपेक्स कमेटी के सदस्यों के साथ राज्य सरकार पंडितों में विश्वास बहाली के उपायों पर विचार करने वाली है, उनकी पंडित समुदाय में न तो कोई पैठ है और न ही कोई विश्वसनीयता। जम्मू में संवाददाता सम्मेलन में पनुन कश्मीर के कन्वीनर डॉ. अग्निशेखर ने एपेक्स कमेटी की संदेहास्पद संरचना पर सवाल उठाते हुए कहा कि वह एपेक्स कमेटी की शनिवार को जम्मू में होने वाली बैठक का इसलिए विरोध करते हैं, क्योंकि इनमें से कुछ ऐसे भी सदस्य हैं जिनकी समुदाय में मान्यता ही नहीं है।
डॉ. अग्निशेखर ने कहा कि कश्मीरी पंडित अगर सरकार के विश्वास बहाली उपायों के चलते कश्मीर वापस जाते हैं तो उनके सामने मात्र तीन विकल्प हैं। पंडितों को या तो आजादी के हक में नारे लगाने पड़ेंगे या फिर पाकिस्तान के पक्ष में आवाज उठानी पड़ेगी या फिर उन लोगों का समर्थन करना पड़ेगा जो कश्मीर में भारतीय संविधान को कमजोर करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि इनमें से कश्मीरी पंडित किसी भी बात का समर्थन नहीं कर सकते, क्योंकि वह राष्ट्रवादी होने की ही सजा पिछले इक्कीस वर्षो से भुगत रहे हैं। उन्होंने कहा कि पंडितों को वादी में यूनियन टेरेटरी दर्जे के साथ होमलैंड का विकल्प ही वापस कर सकता है।
(दैनिक जागरण, 05 सितम्बर 2011)

घाटी वापसी पर मिलेगी हर सुविधा


जम्मू। राजस्व, राहत और पुनर्वास मंत्री रमण भल्ला ने कहा है कि सरकार कश्मीर विस्थापितों को घाटी वापसी के दौरान ढांचागत सुविधाएं, आवास और सुरक्षा मुहैया कराए जाएंगे। किराये पर रह रहे विस्थापितों को भी फ्लैट उपलब्ध कराने पर सरकार विचार कर रही है। पांच हजार आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनकी जांच चल रही है। सरकार की प्राथमिकता विधवाओं और बीमार परिवारों को दिलवाना होगा। मंत्री ने यह भरोसा एपेक्स लेवल एडवाइजरी कमेटी की बैठक में दिलाया।  
उन्होंने कहा कि विस्थापित शीघ्र ही घाटी अपने घरों को वापस जाएंगे। केंद्र व राज्य सरकार की हर संभव कोशिश है कि कश्मीर में शांति पूरी तरह से कायम की जाए। विस्थापितों के पुनर्वास के लिए केंद्र सरकार ने 1618.41 करोड़ रुपये का पैकेज मंजूर किया है। सरकार ने कश्मीरी विस्थापितों के लिए जगटी में 385 करोड़ रुपये की लागत से 4218 फ्लैट उपलब्ध करवा रही है, जिसमें 3504 तैयार हो चुके हैं। शेष अगले महीने पूरे हो जाएंगे। इन फ्लैटों में 3200 परिवारों को शिफ्ट किया गया है। प्रधानमंत्री के विशेष पैकेज के तहत सरकार ने तीन हजार नौकरियां पैदा की है। पहले चरण में एसएसआरबी ने 2120 कश्मीरी विस्थापित युवाओं का चयन किया है। इनमें से 1428 युवाओं ने नौकरियां ज्वाइन की है। कश्मीरी विस्थापितों को आवास उपलब्ध करवाने के लिए बारामूला, वेसू, मट्टन, हावल, शेखपोरा ने 902 क्वार्टर बनाए हैं। सरकार ने वेरीनाग के नजदीक क्वार्टर बनाने के लिए जगह की पहचान कर रही है। सरकार ने कश्मीरी विस्थापितों की राहत राशि को पांच से आठ हजार रुपये का मामला केंद्र के समक्ष उठाया है। कमेटी ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर कश्मीरी विस्थापितों की समस्याओं को प्राथमिक स्तर पर हल करने का वायदा किया। इस मौके पर गृह राज्यमंत्री नसीर असलम वानी, जीएडी के आयुक्त सचिव एमएस खान, राजस्व के आयुक्त सचिव केआई खान, डिवीजनल कमिश्नर जम्मू डॉ. पवन कोतवाल और कमेटी के सदस्य मौजूद थे।

(दैनिक जागरण, 05 सितम्बर 2011)

Friday, July 29, 2011

Land mafia eyeing Kashmiri Pandits owned land in Valley

SRINAGAR: Two decades after they left their hearth and home in the Valley, theland mafia is allegedly trying to grab land belonging to Kashmiri Pandits. Sources said that the land mafia enjoys the patronage of influential politicians and administration officials.

The '90s saw an exodus of the Pandits with militancy breaking out in the Valley. They fled their homes to settle in elsewhere in the country.

Now, up for grabs are huge tracts of land where their homes and fields and religious places once stood. Over the years, hundreds of kanals (a land measure) have now been usurped. A kanal is equivalent to a patch of land stretching across 40 feet by 120 feet.

Maharaj Krishen Raina, president of Jwala Ji Samiti Khrew, a non-profit organisation, said that the samiti owns 300 kanals of agricultural land besides non-agricultural land.

"The land was being maintained by the samiti until Pandits migrated from the Kashmir Valley en masse in the 1990s. Eventually, landgrabbers and mafia groups started eying precious land of our world-famous shrine situated beneath a hillock near the Khrew-Srinagar Road," said Raina. "Besides, land on which a cremation ground and a children's graveyard stood is also being encroached upon."

Raina blamed the authorities for the encroachment. "The government has failed to enact a Bill for protection of Hindu shrines and Temples in the Valley," he told Mumbai Mirror. Convenor of Kashmiri Pandit Sangarsh Samiti, Sanjay Tikoo, alleged that a few revenue officials were hand in glove with the land mafia.

Govt. REFUTES ALLEGATION

However, government officials deny the allegation . "No temple land or any other land belonging toKashmiri Pandits has been encroached upon," said an official from the Revenue Department who refused to be identified.
(Economic Times, 22 July 2011)

Thursday, June 23, 2011

दिल्ली में कश्मीरी पंडितों के फंड में लगी सेंध

कश्मीर में आतंकवाद से त्रस्त होकर राजधानी दिल्ली आए 3353 विस्थापित कश्मीरी पंडितों का रिकार्ड राजस्व विभाग से गायब हो चुका है, मगर उन्हें मानवीय सहायता के रूप में दी जाने वाली राशि अभी भी बांटी जा रही है। इस चौंकाने वाले तथ्य का खुलासा सूचना के अधिकार कानून (आरटीआइ) के तहत मांगी गई जानकारी के जवाब में राजस्व विभाग के अधिकारियों ने किया है। इस खुलासे के बाद राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं कि प्रति माह विस्थापितों को दी जाने वाली लाखों रुपये की मानवीय सहायता राशि किसकी जेब में जा रही है। जबकि यह रिकार्ड कब से गायब है इसकी भी सरकारी जवाब में कोई जानकारी नहीं दी गई है। कश्मीर में कुछ वर्ष पहले आतंकवाद विस्थापित कश्मीरी पंडित शरणार्थियों के रूप में बड़ी संख्या में राजधानी आ गए थे। उन्हें राजधानी एवं इसके आसपास के क्षेत्रों में फिर से बसने में सरकार ने मदद की थी। उस समय सरकार की ओर से विस्थापित कश्मीरी पंडितों को प्रति व्यक्ति 1250 रुपये और प्रति परिवार पांच हजार रुपये की राशि मानवीय सहायता के रूप में देने की योजना शुरू की गई थी। यह राशि अब भी दिल्ली सरकार के राजस्व विभाग की रिलीफ ब्रांच द्वारा विस्थापित कश्मीरी पंडितों को जारी की जा रही है। प्रति वर्ष यह राशि 50 लाख रुपये के ऊपर है। और यह गोरखधंधा कितने सालों से जारी है इसकी भी अभी तक कोई जानकारी नहीं दी गई है। कड़कड़डूमा कोर्ट में काम करने वाले पवन कुमार कौल ने इस संबंध में आरटीआइ के तहत राजस्व विभाग से जानकारी मांगी थी। पूछा गया था कि राजस्व विभाग में मानवीय सहायता पाने वाले कितने विस्थापित कश्मीरी पंडितों के नाम दर्ज हैं और उन्हें कितनी राशि मानवीय सहायता के रूप में दी जाती है? इसके अतिरिक्त लाभांवित परिवारों का पता, फोन नंबर एवं अन्य सम्पूर्ण विवरण क्या है? जवाब में राजस्व विभाग की रिलीफ ब्रांच के एसडीएम डीपी राणा ने बताया कि दिल्ली सरकार द्वारा 3353 विस्थापित कश्मीरी पंडितों को मानवीय सहायता राशि दी जा रही है। उन्हें प्रति व्यक्ति 1250 और प्रति परिवार पांच हजार रुपये की राशि दी जाती है। अंतिम प्रश्न के जवाब में एसडीएम ने कहा है कि राजस्व विभाग में किसी भी विस्थापित कश्मीरी पंडित का पूर्ण विवरण, फोन नंबर और पतों का कोई रिकार्ड मौजूद नहीं है। एसडीएम के जवाब से पता चलता है कि कार्यालय से विस्थापित पंडितों का रिकार्ड गायब है।
(dainik jagran),23\06\2011

Wednesday, June 22, 2011

At least 399 Kashmiri Pandits killed in JK since 1990: Survey

19 June 2011
SRINAGAR: A Kashmiri Pandit organisation claimed that at least 399 Pandits have been killed since the eruption of militancy in Jammu and Kashmir in 1990, with 75 per cent of them killed in the first year alone.

"The first list of a survey done by us suggests that 399 Pandits were killed. Our estimate is that the total number of them killed will be around 650 in the last 20 years," Kashmir Pandit Sangharsh Samiti (KPSS) President Sanjay Tickoo told reporters here.
He said the survey to find the exact number of Pandits killed was done in 2008 and 2009, which revealed that 302 members of the community were killed in 1990 alone. 'Over 100 militants waiting at launch pads to enter J-K'
New Delhi (May 08 2011) : At least 700 militants are being trained at various terror camps across the LoC with over 100 waiting at "launch pads" to infiltrate into Jammu and Kashmir, officials said.
Intelligence inputs suggested that about 700 to 800 militants are holed up in different camps across the Line of Control and getting terror training, Home Ministry officials said.
"Despite our repeated complaints to Pakistan, the terror infrastructure continues to exist across the border and hundreds of terrorists are getting training there. Over 100 are waiting at launch pads to enter Jammu and Kashmir at any time," an official said.
The intelligence inputs also suggested that authorities in Pakistan may try to push more terrorists, belonging to Lashkar-e-Taiba and Hizbul Mujahideen, into Kashmir in an attempt to divert attention from itself following the killing of Osama bin Laden.

(Courtesy : http://articles.economictimes.indiatimes.com)

Saturday, May 21, 2011

कश्मीरी पंडितों को मिले अल्पसंख्यक का दर्जा

जम्मू (21 May 2011)। विस्थापित कश्मीरी पंडित समुदाय का अस्तित्व कायम रखने के लिए पंडितों को अल्पसंख्यक दर्जा दिया जाना आवश्यक है। राज्य सरकार को चाहिए कि वह पंडितों को अल्पसंख्यक दर्जा देने के लिए उपायों की तलाश करे। यह बात राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने जम्मू कश्मीर सरकार को लिखे पत्र में कही है।

आयोग के चेयरमैन वजाहत हबीबुल्लाह ने राज्य सरकार को पंडित समुदाय को अल्पसंख्यक दर्जा देने की सिफारिश हाल ही में कश्मीरी पंडित दलों के साथ बैठक करने के बाद की है। पंडित संगठनों के कई नेताओं ने ऑल इंडिया कश्मीरी समाज के बैनर तले इसी महीने वजाहत हबीबुल्लाह से बैठक कर उन्हें विस्थापित कश्मीरी पंडितों की पीड़ा को बताया था। राज्य के दौरे पर आए समाज के प्रधान मोती कौल ने कहा है कि राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने राज्य सरकार को अपनी सिफारिश देकर पंडितों के वर्षों के अपने दावे पर मुहर लगा दी है।

उन्होंने कहा कि आल इंडिया कश्मीरी समाज पिछले कई वर्षो से पंडितों को अल्पसंख्यक दर्जा दिलवाने के लिए प्रयास कर रहा है। इस सिलसिले में उन्होंने वर्ष 1999 से विभिन्न हस्तियों से मिल कर उनके नोटिस में पंडितों को अल्पसंख्यक दर्जा दिए जाने की मांग लाई है, ताकि अपने अस्तित्व को बचाने की लड़ाई को जीता सके। कौल ने कहा कि कश्मीरी पंडितों को अल्पसंख्यक समुदाय का दर्जा देने की मांग उन्होंने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के समक्ष कोई पहली बार नहीं उठाई है। इससे पहले भी वर्ष 1999 में उठा चुके हैं, उस समय आयोग प्रमुख प्रो.ताहिर महमूद ने भी राज्य सरकार को पंडितों को अल्पसंख्यक दर्जा देने की सिफारिश की थी।

(Courtesy : www.jagran.com)

Wednesday, May 11, 2011

J&K : Muslim village elects first woman pandit to panchyat

M Saleem Pandit, TNN | May 11, 2011
Winds of change: Aasha Jee is the first Kashmiri Pandit woman to win the panchyat polls in a predominantly Muslim village in Kashmir's Kunzer block.

KUNZER: Aasha Jee is the first Kashmiri Pandit woman to win the panchyat polls in a predominantly Muslim village in Kashmir's Kunzer block. Aasha defeated her lone rival Sarwa Begum by 11 votes to be elected as a panch of Wusan village. Aasha won 55 votes while Sarwa got 42 votes.
Around 20 km from Srinagar, only four Pandit families currently live at Wusan. Aasha's family was one of those who stayed back when others from the community left Kashmir for militancy. Aasha (59), who lives with husband Radha Krishan and two sons, said, "Muslim brethren of the village voted for me. I will try to live up to their expectations if the state government gives powers to panchyats under 74th amendment of the Constitution."

Local revenue official Abdul Hamid Wani had encouraged Aasha to contest. "It didn't matter whether she is a Muslim or not. She is a nice person. So, we chose her," said Wani.

Her rival Sarwa Begum was gracious in defeat. "Luck played a part in the elections. I wish Aasha success and hope she will work for the village," she said. Aasha's elder son Suresh Kumar is a constable in Jammu & Kashmir police while the younger one helps his father at his village grocery shop. A proud Radha Kishan said, "She is an energetic woman and will definitely help in the village's development."

Wusan doesn't have a police post or a security force camp though Aasha is vulnerable to attacks by militants who had called for poll boycott in the state.

"My victory should send a clear message to migrant Kashmiri Pandits living in exile in other parts of the country that there is no threat to their lives in Kashmir now," she said. Her parents live in Doda, home to Union health minister Ghulam Nabi Azad, she proudly said.

Over 2,000 sarpanch and more than 15,000 panch were elected for 15,000 constituencies across J&K," said B R Sharma, chief electoral officer. Panchayat polls in the state were held after more than a decade. The last panchayat polls were held in 2001. The state government is now contemplating elections for municipal corporations and committees in urban areas.

(Courtesy : http://timesofindia.indiatimes.com)

First Kashmiri pandit woman wins panchayat polls in Valley

M Saleem Pandit, 10 May, 2011
KUNZER: Aasha Jee is the first Kashmiri Pandit woman in the Muslim dominated Kashmir valley to be elected as a Panch in the J&K panchayat polls.

Pandits, a minority community in Kashmir, were displaced after the eruption of violent insurgency against India in 1989-90. However, Aasha's family is one of the four that stayed back in her village Wussan, Kunzer block on Srinagar-Gulmarg road.

Aasha defeated her lone rival, Sarwa Begum, a Kashmiri Muslim woman, by 11 votes in the seventh phase of polling on Sunday. Aasha bagged 55 votes while Sarwa got 42 votes.

(Courtesy : http://articles.timesofindia.indiatimes.com)

Saturday, March 12, 2011

पंडितों की आवाज उठाएं विपक्षी दल

जम्मू। कश्मीरी पंडित कांफ्रेंस ने विपक्षी दलों के विधायकों से अपील की है कि वह विधानसभा में कश्मीरी हिंदू श्राइन व मंदिर बिल पारित करवाने और पंडितों की वादी वापसी के मुद्दों को उठाकर पंडित समुदाय की आवाज सरकार के कानों तक पहुंचाएं। कांफ्रेंस ने इसी प्रकार की अपील विपक्ष के संसद सदस्यों से भी की है।

काफ्रेंस के प्रधान कुंदन कश्मीरी ने केंद्र व राज्य सरकार से वादी में कश्मीरी पंडित समुदाय की वापसी को यकीनी बनाने को कहा। कश्मीरी ने शुक्रवार को जारी बयान में कहा कि यह सर्वविदित सच है कि पंडित समुदाय कश्मीर की पांच हजार साल पुरानी सभ्यता के पूरक हैं, जबकि बहुसंख्यक समुदाय के लोगों का आना सदियों बाद हुआ है।

उन्होंने कहा कि अलगाववादियों व उनके जैसे भाषा बोलने वाले दलों की ओर से वादी में जो माहौल तैयार किया गया है, उसके मद्देनजर कश्मीरी पंडितों को वादी में एक ही जगह पर बसाया जाना उचित होगा।

(Courtesy : www.jagran.com, 12.03.2011)

Friday, December 17, 2010