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Wednesday, April 4, 2012

फ्रंट कार्यकर्ताओं पर बरसीं लाठियां


जम्मू। राज्य सरकार पर जम्मू से भेदभाव का आरोप लगाते हुए जम्मू-कश्मीर डेमोक्रेटिक फ्रंट (जेकेडीएफ) के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने सोमवार सुबह सचिवालय घेराव का प्रयास किया। लेकिन सुरक्षाबलों ने बल प्रयोग से उनके मंसूबे को विफल कर दिया। कार्यकर्ताओं को रोकने के लिए पुलिस ने जमकर लाठियां भांजी। इसमें फ्रंट के प्रधान समेत आठ लोगों को चोटें आईं। घायलों को जीएमसी अस्पताल में दाखिल करवाया गया। इस दौरान शहर में करीब एक घंटे तक ट्रैफिक व्यवस्था ठप रही। सुबह से ही पार्टी कार्यकर्ता इंद्र चौक पर एकत्रित होने लगे थे। करीब 11 बजे सैकड़ों कार्यकर्ता इंदिरा चौक से सचिवालय घेराव के लिए निकले। कार्यकर्ता हाथ में पार्टी का झंडा और बैनर लिए हुए थे। बैनर पर उन्होंने जम्मू संभाग से भेदभाव को लेकर स्लोगन लिखे थे। 
प्रदर्शनकारियों ने सचिवालय के आसपास लगी धारा 144 को तोड़ने का प्रयास किया। पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोका। दोनों पक्ष में काफी धक्का-मुक्की हुई। इसके बाद भी जब वे नियंत्रण में नहीं आए तो पुलिस ने बल प्रयोग शुरू कर दिया। लाठीचार्ज में घायल हुए कार्यकर्ताओं की पहचान विनोद खन्ना, फौजा सिंह, विक्रम शर्मा, अंकुश शर्मा, अनिल बलगोत्रा तथा मुनीष खजूरिया के रूप में हुई। इससे पहले कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए फ्रंट के चेयरमैन अनिल गुप्ता ने कहा कि पिछली सरकारों की तरह नेकां-कांग्रेस गठबंधन सरकार ने भी जम्मू से हर क्षेत्र में भेदभाव किया है। विकास कार्य केवल कश्मीर में ही करवाए जा रहे हैं। कश्मीर केंद्रित सरकार ने हदबंदी को वर्ष 2026 तक नामुमकिन बना दिया है। जनसंख्या और क्षेत्रफल के हिसाब से जम्मू का हिस्सा कश्मीर की अपेक्षा अधिक है। इसलिए सरकार ने हदबंदी पर रोक लगा दी है। राज्य सरकार की नौकरियों पर कश्मीर संभाग का वर्चस्व है। एसपीओ तथा वीडीसी के सदस्यों को समय पर वेतन नहीं दिया जाता। जम्मू संभाग से बिजली और पानी के किराये वसूले जाते हैं। जबकि कश्मीर में यह सब मुफ्त है। राज्य कैबिनेट में मौजूद जम्मू के मंत्री भी कुछ नहीं बोलते। बाद में अनिल गुप्ता ने लाठीचार्ज की निंदा की और कहा कि सरकार उनकी आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है। (3/4/2012)

Thursday, February 23, 2012

फिर गर्माया भेदभाव का मुद्दा


जम्मू। सरकार की ओर से राज्य में सोलह नई शहरी स्थानीय निकाय के गठन में जम्मू से भेदभाव का मुद्दा गर्मा गया है। राज्य विधानसभा सत्र से ठीक पहले विपक्ष को गठबंधन सरकार के खिलाफ एक और मुद्दा मिल गया है, जिसे लेकर विभिन्न दल सरकार को घेरने की तैयारी में हैं। जम्मू-कश्मीर डेमोक्रेटिक फ्रंट ने सचिवालय के बाहर इस मुद्दे पर सरकार का घेरने का फैसला किया है। भेदभाव के मुद्दे पर फ्रंट वीरवार शाम शहर में मशाल रैली निकालने जा रही है। फ्रंट के चेयरमैन अनिल गुप्ता ने सरकार के फैसले को जम्मू से भेदभाव की ताजा मिसाल बताते हुए कहा कि सरकार ने कश्मीर में बारह जबकि जम्मू में चार नई शहरी स्थानीय निकाय बनाकर साबित कर दिया है कि सरकार की नजर में कश्मीर सर्वोपरि है। 

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार स्थानीय निकाय की संख्या के आधार पर ही नगर निगम को फंड जारी करती है और जम्मू में इनकी संख्या कम होने से विकास कार्यो पर भी असर पड़ेगा। उधर, प्रदेश भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने भी इसे जम्मू से भेदभाव करार देते हुए कहा है कि पिछले तीन साल में इस गठबंधन सरकार ने हर क्षेत्र में जम्मू की अनदेखी की है। इस मुद्दे पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने बुधवार को गंग्याल में सरकार विरोधी प्रदर्शन भी किया। भाजपा के जम्मू जिला प्रधान राजेश गुप्ता की अगुवाई में पार्टी कार्यकर्ताओं ने सरकार का पुतला जलाकर अपना रोष भी प्रकट किया। जम्मू से कांग्रेस मंत्रियों के इस्तीफे की मांग करते हुए राजेश गुप्ता ने कहा कि जम्मू से भेदभाव के लिए ये मंत्री सबसे अधिक दोषी है और इन मंत्रियों ने जम्मू की जनता के साथ विश्वासघात किया है। विधानसभा चुनाव 2008 में जनता ने इन पर विश्वास व्यक्त कर विधानसभा भेजा था। भाजपा इस मुद्दे पर चुप नहीं बैठेगी और आने वाले दिनों में विधानसभा व सदन के बाहर भी इस मुद्दे को उठाया जाएगा। (दैनिक जागरण, 23 फरवरी 2012)

Tuesday, February 7, 2012

पुनर्गठन से ही खत्म हो सकती है अनदेखी


जम्मू। राज्य के पुनर्गठन की मांग दोहराते हुए जम्मू स्टेट मोर्चा ने केंद्र व राज्य सरकार पर जम्मू संभाग के साथ भेदभाव का आरोप लगाया है। मोर्चा के प्रधान प्रो. वीरेंद्र गुप्ता ने सरकार के तीनों संभागों के बराबर विकास के दावों को जम्मूवासियों के साथ कोरा मजाक बताया। उन्होंने कहा है कि सरकार समानता की बड़ी-बड़ी बातें तो करती है, लेकिन स्थिति विपरीत है। गुप्ता ने कहा है कि केंद्र सरकार ने डल झील के संरक्षण व साफ-सफाई के लिए 386 करोड़ की राशि जारी कर स्पष्ट कर दिया है कि सरकार को जम्मू के पर्यटन स्थलों की फिक्र नहीं है। 

हकीकत तो यह है कि पिछले वर्ष कश्मीर में करीब दो लाख ही पर्यटकों का आगमन रहा है, जबकि जम्मू में माता वैष्णों देवी की यात्रा के लिए ही एक करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं का जम्मू में पिछले वर्ष आना हुआ है। गुप्ता ने जम्मू में पार्टी के कार्यकर्ताओं की बैठक में कहा कि हाल ही में सूचना विभाग में हुई असिस्टेंट इंफारमेशन ऑफिसर की नियुक्तियों में भी किसी भी जम्मूवासी को जगह नहीं मिली है। वहीं पर जम्मू संभाग के बर्फबारी से प्रभावित डोडा, किश्तवाड़ व रामबन के जिलों में लोगों को अभी तक मुआवजा ही नहीं मिल पाया है। 

(07 फरवरी, दैनिक जागरण)

Wednesday, March 30, 2011

पीड़ितों को मुआवजे में जम्मू से भेदभाव

जम्मू। रियासत सरकार ने २०१० में वादी में तीन महीने तक भड़की हिंसा में मारे गए १०२ लोगों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये मुआवजा देने का फैसला लिया है। पर सरकार का यह फैसला श्री अमरनाथ संघर्ष समिति को अखर रहा है। संघर्ष समिति के सदस्यों के मुताबिक श्री अमरनाथ भूमि आंदोलन के दौरान मरने वाले १४ लोगों में से रियासत सरकार द्वारा सिर्फ दो लोगों को ही तीन लाख रुपये मुआवजा दिया है।

समिति के सदस्यों का कहना है कि सेना और सुरक्षा बलों पर पथराव करने वालों को सरकार पांच पांच लाख मुआवजा दे रही है जबकि अपने अधिकारों के लिए संघर्ष के दौरान जान गंवाने वाले जम्मू के लोगों को सरकार ने मुआवजा नहीं दिया है।

उनका यह भी कहना है कि सरकार पक्षपात को बढ़ावा दे रही है। समिति के चेयरमैन ब्रिगेडियर (रिटायर्ड) सुचैत सिंह का कहना है कि पत्थरबाजों को उकसाया जा रहा है। पत्थरबाजी का इनाम देकर सरकार अगली गर्मियों में भी हिंसा को सुनिश्चित कर रही है। ज्ञात रहे कि सरकार ने हिंसा के दौरान मरने वालों के लिए ५.१० करोड़ मंजूर किया है। इससे प्रत्येक परिवार को पांच-पांच लाख बतौर मुआवजा दिया जाएगा।

सरकार के इस फैसले को लेकर समिति जल्द ही बैठक करने वाली है। बैठक में कैबिनेट के ताजा फैसले पर भी चर्चा की जाएगी जिसमें भूमि आंदोलन के दौरान सांप्रदायिक हिंसा के शिकार परिवारों को भी मुआवजा दिया गया है। समिति के सदस्यों का कहना है कि भूमि आंदोलन के दौरान जम्मू खित्ते के १४ लोगों की जानें गई है। आंदोलन के दौरान भद्रवाह और जम्मू में मरने वाले दो लोगों के परिजनों को ही मुआवजा दिया गया है।

समिति के प्रवक्ता डा. नरेंद्र सिंह का कहना है कि सरकार समिति को आंदोलन करने पर मजबूर कर रही है। सुरक्षा बलों पर पथराव करने वालों को पांच पांच लाख और राष्ट्रवादी लोगों को कोई मुआवजा नहीं दिया जा रहा है। स्टेट मोर्चा के विधायक अश्वनी शर्मा का कहना है कि मामले को हाउस में उठाया जाएगा।