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Wednesday, January 25, 2012

जम्मू में राहत अभियान चलाएगी वायुसेना


जम्मू। जम्मू क्षेत्र में बुधवार को पर्वतीय इलाकों में मौसम साफ होने के साथ ही वायुसेना ने किश्तवाड़ जिले में हिमपात के दौरान फंसे तीन सौ लोगों को निकालने की तैयारियां शुरू कर दी है। आधिकारिक प्रवक्ता ने बताया कि भारी हिमपात के कारण सोंदर, दचान, मारवाह, नवपाछी और वारवां गांवों का संपर्क शेष इलाकों से कट गया था। प्रवक्ता ने बताया कि इन गांवों में सड़क संपर्क नहीं है। उन्होंने बताया कि विंग कमांडर अनुराग कुमार के नेतृत्व में 130 हेलीकॉप्टर इकाई द्वारा यह अभियान चलाया जाएगा। हिमपात, हिमस्खलन एवं बारिश से प्रभावित जम्मू एवं कश्मीर में सेना एवं वायुसेना प्रति दिन बचाव एवं राहत कार्य चला रही है। 

Thursday, January 5, 2012

अलगाववादियों को देश भ्रमण का न्योता


श्रीनगर। सेना की चिनार कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल सैय्यद अता हसनैन ने सोमवार को कश्मीर के अलगाववादियों को ऑपरेशन सद्भावना के तहत भारत भ्रमण पर भेजने की पेशकश की है। हसनैन ने कहा कि बीते साल करीब 40 आतंकी घुसपैठ में कामयाब रहे, लेकिन इसकी पक्की जानकारी नहीं है। सोमवार को कोर मुख्यालय में कश्मीर प्रीमियर लीग क्रिकेट प्रतियोगिता में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली तीन टीमों को कोलकाता रवाना करने के बाद हसनैन पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने सेना द्वारा स्थानीय छात्र-छात्राओं और अन्य लोगों को भारत भ्रमण व शैक्षणिक यात्राओं पर भेजे जाने के अलगाववादियों के विरोध को हताशा का प्रतीक बताया। कोर कमांडर ने कहा कि हमने कश्मीर के बुजुर्गो को अजमेर शरीफ भेजा, कश्मीरी बच्चों को विभिन्न दर्शनीय स्थलों के अलावा जियारतों में भी भेजा गया। इन बच्चों के साथ उनके स्कूलों के अध्यापक भी रहते हैं। लोगों की सेना के साथ कम होती दूरी से हुर्रियत और देशविरोधी तत्व हताश हैं। इसलिए वह आरोप लगा रहे हैं। हसनैन ने कहा कि अगर हुर्रियत नेता चाहें तो वह भी इन यात्राओं का हिस्सा बन सकते हैं। उन्हें सच्चाई का पता चल जाएगा। उन्होंने कहा कि घुसपैठ को पूरी तरह बंद करना फिलहाल संभव नहीं है, लेकिन हम इसे न्यूनतम स्तर पर ले आए हैं। अगले दो तीन माह में घुसपैठ की आशंका है।

Wednesday, December 14, 2011

अफगानिस्तान से आ सकते हैं आतंकी


श्रीनगर। सेना की 15 कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन ने कहा कि अफगानिस्तान से नाटो सेना के हटने की पूरी संभावना है, ऐसे में वहां सक्रिय आतंकी कश्मीर का रुख कर सकते हैं। उन्होंने आशंका जताई कि अगले तीन माह के दौरान सीमा पार से घुसपैठ की कोशिशों में तेजी आएगी। हसनैन बुधवार को बारामूला जिले में एलओसी के साथ सटे उड़ी सेक्टर में एक कार्यक्रम के बाद पत्रकारों के सवालों के जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद पर अफगानीस्तान और पाकिस्तान के हालात का सीधा असर होता है। जब रूसी सेना अफगानिस्तान से हटी थी तो वहां सक्रिय कई आतंकी जम्मू-कश्मीर पहुंचे और यहां आतंकी हिंसा में तेजी आई। अब वहां से नाटो सेना के हटने की पूरी संभावना है, इसलिए आतंकी फिर कश्मीर का रुख कर सकते हैं। कोर कमांडर ने कहा कि अगला साल जम्मू-कश्मीर के लिए बहुत अहम है, क्योंकि वर्ष 2011 में जो अमन रहा है, उससे आतंकी और उनके आका पूरी तरह हताश हैं। इसलिए वह चाहेंगे कि वर्ष 2012 में हिंसा हो और मरनासन्न आतंकवाद को फिर से जिंदा किया जाए। उन्होंने कहा कि इस समय सीमा पार स्थित लांचिंग पैड पर आतंकियों की एक बड़ी तादाद घुसपैठ के लिए तैयार बैठी है। आतंकी इस बार उड़ी सेक्टर से घुसपैठ की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमें आतंकियों के मंसूबों का पूरा आभास है और उनसे निपटने के लिए हमने पूरी तैयारी कर रखी है। बीते ढाई माह के दौरान हमने घुसपैठ का कोई प्रयास कामयाब नहीं होने दिया है, लेकिन इससे पता चलता है कि आतंकी इस बार जनवरी से मार्च माह तक पहाड़ों पर बर्फ के दौरान घुसपैठ की कोशिश करेंगे। (दैनिक जागरण, जम्मू संस्करण)

नाटो सैन्य वापसी से कश्मीर को खतरा
श्रीनगर। अफगानिस्तान से नाटो सेना के हटने की पूरी संभावना है। ऐसे में वहां सक्रिय आतंकी कश्मीर का रुख कर सकते हैं। सेना की 15 कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन ने आशंका जताई है कि अगले तीन माह के दौरान सीमा पार से घुसपैठ की कोशिशों में तेजी आएगी। सैयद अता हसनैन बुधवार को बारामूला जिले में एलओसी के साथ सटे उड़ी सेक्टर में सीमांत क्षेत्र विकास कार्यक्रम के तहत जारी योजनाओं की समीक्षा के लिए आयोजित एक बैठक के बाद बातचीत कर रहे थे। हसनैन ने कहा कि अफगानिस्तान और पाकिस्तान के हालात का सीधा असर वादी में आतंकवाद पर पड़ता है। उन्होंने बताया कि रूसी सेना के अफगानिस्तान से हटने के बाद वहां सक्रिय कई आतंकियों ने जम्मू-कश्मीर पहुंचकर वारदातों को अंजाम दिया था। अब वहां से नाटो सेना के हटने की पूरी संभावना है। इसलिए आतंकी फिर कश्मीर का रुख कर सकते हैं। इसके अलावा पाकिस्तान के अंदर खराब हालात का असर भी कश्मीर में होगा। कोर कमांडर ने कहा कि अगला साल जम्मू-कश्मीर के लिए बहुत अहम है, क्योंकि वर्ष 2011 में रहे अमन से आतंकी और उनके आका हताश हैं। इसलिए वह चाहेंगे कि वर्ष 2012 में हिंसा हो और आतंकवाद को फिर जिंदा किया जाए। उन्होंने कहा कि इस समय सीमा पार स्थित लांचिंग पैड पर आतंकियों की बड़ी तादाद घुसपैठ के लिए तैयार बैठी है। आतंकी इस बार उड़ी सेक्टर से घुसपैठ की कोशिश कर रहे हैं। हसनैन ने कहा कि हमें आतंकियों के मंसूबों का पूरा आभास है और उनसे निपटने के लिए हमने पूरी तैयारी कर ली है। उन्होंने कहा कि बीते ढाई माह के दौरान हमने सीमा पार से घुसपैठ का कोई प्रयास कामयाब नहीं होने दिया है, लेकिन इससे पता चलता है कि आतंकी इस बार जनवरी से मार्च तक पहाड़ों पर बर्फ के दौरान ज्यादा से ज्यादा घुसपैठ की कोशिश करेंगे। (दैनिक जागरण, राष्ट्रीय संस्करण)
 

Thursday, November 10, 2011

हर चुनौती का सामना करने को रहें तैयार


जम्मू। पाकिस्तान, चीन जैसे देशों से घिरे जम्मू-कश्मीर में किसी भी स्थिति का सामना करने की सशस्त्र सेनाओं की तैयारियों का जायजा लेने मंगलवार को वायुसेना की पश्चिमी कमान के एयर ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ एयर मार्शल डीसी कुमारिया पहुंचे। उन्होंने जवानों से हर चुनौती का सामना करने को तैयार रहने को कहा। इस दौरान उन्होंने जम्मू संभाग के राजौरी, पुंछ जिले के फावर्ड इलाकों में हेलीकॉप्टर यूनिटों की ऑपरेशन तैयारियों का भी निरीक्षण किया। एक दिवसीय दौरे पर जम्मू पहुंचे एयर मार्शल ने वायुसेना के अधिकारियों, जवानों से बातचीत की। जम्मू एयरफोर्स स्टेशन के एयर आफिसर कमांडिंग एयर कमाडोर नितिन साठे ने पश्चिमी कमान के प्रभारी को वायुसेना की हेलीकॉप्टर यूनिटों द्वारा की गई तैयारियों के बारे में बताया। इस दौरान हवाई सीमाओं की सुरक्षा के मुद्दे पर भी विचार किया गया। ऑपरेशनल तैयारियां का जायजा लेने के बाद वह दिल्ली के लिए रवाना हो गए। विदित हो कि इसी माह थलसेना अध्यक्ष जनरल वीके सिंह ने लद्दाख क्षेत्र का दौरा कर वहां चल रही सेना की तैयारियों का निरीक्षण किया था।

Tuesday, November 8, 2011

शांति बहाली में सेना की भूमिका अहम


जम्मू, 8 नवम्बर। प्रथम परमवीर चक्र विजेता शहीद मेजर सोमनाथ शर्मा की पुण्यतिथि पर डोगरा ब्रांण प्रतिनिधि सभा की ओर से आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए शर्मा ने कहा कि राज्य में दो दशकों से जारी परोक्ष युद्ध का मुकाबला कर रहे सैनिकों व अ‌र्द्धसैनिक बलों ने सराहनीय भूमिका निभाई है। सेना के प्रयासों से ही राज्य में शांति लौटी है। ऐसे में राज्य व देश को उन महान सपूतों को भी नहीं भूलना चाहिए जिन्होंने अपने प्राणों का बलिदान देकर देश की रक्षा की। मंत्री ने कहा कि मेजर सोमनाथ शर्मा बहादुरी की एक मिसाल है, जो दशकों तक प्रेरणास्रोत बने रहेंगे। समारोह में उपस्थिति प्रतिनिधियों की मांग पर मंत्री ने कहा कि वह कोशिश करेंगे कि जम्मू एयरपोर्ट पर मेजर सोमनाथ शर्मा की प्रतिमा स्थापित हो। समारोह के अंत में मंत्री ने कश्मीर में मुठभेड़ में शहीद हुए ले. सुशील कुमार के पिता को भी सम्मानित किया।

Friday, August 12, 2011

नियंत्रण रेखा का जायजा लेकर लौटे सेना अध्यक्ष

जम्मू। जम्मू क्षेत्र के अखनूर में नियंत्रण रेखा के हालात, आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेकर थलसेना अध्यक्ष जनरल वीके सिंह वीरवार दोपहर को दिल्ली के लिए रवाना हो गए। उन्हें सेना की उत्तरी कमान, जम्मू एयरफोर्स स्टेशन के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने विदा किया।

दो दिवसीय दौरे के समापन से पूर्व जनरल ने जम्मू जिले के सीमावर्ती प्लांवाला के साथ सुंदरबनी में नियंत्रण रेखा का दौरा कर घुसपैठ रोकने की तैयारियों का जायजा लिया। उनके साथ उत्तरी कमान प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल केटी परनायक, सोलह कोर के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल जेपी नेहरा भी मौजूद थे।

थलसेना अध्यक्ष ने निर्देश दिए कि नियंत्रण रेखा पर सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने में कोई कमी न लाई जाए। जवान दुश्मन के मंसूबों को नाकाम बनाने के लिए पूरी सतर्कता बरतें।

Thursday, May 19, 2011

NO INFILTRATION THIS YEAR: ARMY

Srinagar May 18: For the first time since eruption of militancy, no infiltration bid was reported from any part of the state between March and May. A senior Army officer on Wednesday told Greater Kashmir that it is for the first time in the past 20-years that no infiltration bid had taken place from March to May from any side along line of control (LoC).

“During past 20 years infiltration bids along the LoC were noticed during the early spring, beginning from middle March. The infiltration usually used to occur during these months as militants start crossing over with the melting of snow in the upper reaches,” he said.

“We have noticed infiltration bids as early as in March when large number of militants would make attempts to cross over from different routes along LoC in north Kashmir. Mostly we used to notice such attempts in Machil, Keran and Gurez sectors,” he added.
“We don’t know why the infiltration bids have not taken place this year. Whether, it is a strategic retreat or a well calculated move. It needs to be assessed,” the official added.
Pertinently, two top army officers had recently stated that no infiltration attempts were reported from any part of the state during past 3-months.

(GOC-in-C) of Northern Command Lt Gen K T Parnaik, had recently stated: “As far as our information is concerned,they (militants) have not succeeded in infiltrating into our side yet.” Major General Ravi Thodge, GOC Kilo Force, who is in-charge security of north Kashmir, at the sidelines of a function on Tuesday here had said, “So far there are no reports about infiltration and if they (infiltrators) come, they will be dismantled at the LoC.”

2010 INFILTRATION BIDS
While giving details about the encounters which took place last year the senior Army officer said that nearly 35 persons were killed during infiltration bids or cross LoC encounters in three months (March, April and May) in 2010. On March 26, 2010, first infiltration bid was foiled in north Kashmir’s Keran sector when Army claimed to have killed one militant near Ustad post.

Following the incident, another infiltration bid was noticed on March 27 in the same area. The army claimed that eight persons, including five militants and three soldiers were killed in the ensuing gunfights. The Army on April 30, 2010 had claimed to have foiled another infiltration bid by killing three militants in Machil sector.

The biggest encounter last year occurred from May 7 to May 17 when Army claimed that they had intercepted a “biggest infiltrating group” of around 14 to 22 militants in Rafiabad area of north Kashmir. The Army had said the group had infiltrated through Uri along LOC.
After 10-days of several encounters in Rafiabad forests the then GOC Kilo Force, Major General N George had said 13 persons, including 11 militants and 2 soldiers, were killed in different encounters in the area.

On May 10, paramilitary BSF had claimed to have killed an “infiltrator” in R S Pura sector of Jammu. One soldier was killed in Chowkibal area after militants opened fire on army contingents who had intercepted an infiltrating group on May 12, 2010. Further two soldiers were killed along LoC in Krishna Ghati sector of Rajouri sector.

On May 23, 2010, a Pakistani soldier was killed in cross LoC clash in Poonch district while as on May 25 a BSF personnel was injured in the clash. On May 26, 2010, the army claimed to have killed two “infiltrators” in Tanghdar district. The senior army official had said apart from infiltration bids, the cross LOC clashes too have declined in 2011. “In Kashmir there has been no clash registered. But in Jammu sporadic shoots out do occur,” he added.

(Courtesy : www.greaterkashmir.com)

Thursday, February 17, 2011

पीडीपी के नए पैंतरे के खतरे

विष्णु गुप्त

पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी यानी पीडीपी जैसी राष्ट्रविरोधी राजनीतिक प्रक्रिया का दमन क्यों नही होना चाहिए? क्या भारतीय सत्ता पीडीपी की राष्ट्रविराधी हरकतों पर अंकुश लगाएगी? अगर नहीं तो फिर भारतीय संप्रभुता इसी तरह लहूलुहान और संकटग्रस्त होती रहेगी? इसका लाभ दुश्मन देश उठाते रहेंगे और हम अपने दुश्मन देश के नापाक इरादों और साजिशों का शिकार होते रहेंगे। भारतीय सत्ता की उदासीनता और कमजोरी का परिणाम ही है कि परहित साधने और परसंप्रभुता को खुश करने की मानसिकता लहलहाती है। पीडीपी की राष्ट्रविरोधी प्रक्रिया पर हमें आइएसआइ-पाकिस्तान की साजिशों को पूरी तरह खंगालना होगा। पीडीपी की पृष्ठभूमि और इसके एजेंडे को देखते हुए कहा जा सकता है कि यह पार्टी आइएसआइ और पाकिस्तान की मोहरा है। कश्मीर पर अंतरराष्ट्रीय दबाव कायम कराना पाकिस्तान की कूटनीति रही है। पीडीपी की यह कोई पहली राष्ट्रविरोधी हरकत नहीं है। पीडीपी ने देश के अविभाज्य अंग की महत्वपूर्ण चोटियों और भूभाग को चीन और पाकिस्तान का अंग दिखा दिया। पीडीपी के अध्यक्ष मुफ्ती मोहम्मद सईद और उनकी बेटी महबूबा सईद की पूरी राजनीतिक संरचना और मानसिकता भारत विरोधी है। देश का नेतृत्व करने वाली पार्टी कांग्रेस की उदासीनता की वजह से पीडीपी की राष्ट्रविरोधी हरकतों को प्रोत्साहन मिलता है। यकीन मान लीजिए, अगर इन बाप-बेटी पर भारतीय कानूनों का सोटा चलता तो इनकी राष्ट्रविरेाधी हरकतों हदें नहीं पार करती। जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और भारतीय संसद ने चीन और पाकिस्तान द्वारा अतिक्रमण किए गए जम्मू-कश्मीर के हिस्से को वापस लेने का संकल्प दर्शाया था। इसलिए भारतीय सत्ता को कर्तव्यबोध होना चाहिए कि इस तरह की राष्ट्रविरोधी हरकतें हमारी संप्रभुता को न केवल संकट में डालती हैं, बल्कि इससे दुश्मन देशों के मंसूबों को भी खाद-पानी मिलता है। जाहिर तौर पर चीन और पाकिस्तान हमारे दुश्मन देश हैं और दोनों देशों ने सामरिक रूप से महत्वपूर्ण हमारी चोटियों और भूभाग पर गैरकानूनी कब्जा कर रखा है। राष्ट की एकता और अखंडता को अक्षुण्ण रखने के लिए जरूरी है कि परराष्ट्रहित साधने वाली नीतियों पर कानून का बुलडोजर चले और सीमाओं पर हमारी सेना दबावरहित होकर अपनी भूमिका निभा सके।

जम्मू-कश्मीर के प्रसंग में यह कहना सही होगा कि भारतीय सत्ता की उदासीनता और गंभीर नीतियों के अभाव में आतंकवादी संगठन और इसके समर्थक पाकिस्तान के मंसूबों को पूरा करते हैं। पाकिस्तान कभी भी शांति का समर्थक हो ही नही सकता है। उसकी पूरी सक्रियता और संरचना भारत विरोधी है। इस यथार्थ को समझने की हमने कभी कोशिश ही नहीं की है। जहां तक चीन का सवाल है तो उसने न सिर्फ जम्मू-कश्मीर, बल्कि पूर्वोत्तर क्षेत्र में हमारे सामरिक भूभागों पर कब्जे करने की कुदृष्टि लगाई हुई है। सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश पर वह हमेशा अपना अधिकार जताता रहता है। पीडीपी और महबूबा जैसों की पैंतरेबाजी से सबसे ज्यादा चीन और पाकिस्तान का ही हित सधेगा। पीडीपी की इस हरकत का यथार्थ क्या है? इस प्रश्न का जवाब भी ढूढ़ना चाहिए कि आखिर भारतीय कश्मीर के महत्वपूर्ण भूभागों को पाकिस्तान और चीन का हिस्सा बताने की जरूरत क्यों पड़ी? क्या इसमें आइएसआइ की कोई भूमिका है? क्या पीडीपी फिर से जम्मू-कश्मीर की राजनीति में उफान पैदा करना और आतंक को फिर से बल देना चाहती है? सही तो यह है कि पीडीपी जैसी राष्ट्रविरोधी राजनीतिक संरचना और सक्रियता का यथार्थ से परे कोई कदम हो ही नहीं सकता है। इस तथ्य पर भी हमें गौर करने की जरूरत है कि जम्मू-कश्मीर की सत्ता से दूर होने के बाद पीडीपी की कोई अहमियत नहीं रही। जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस और नेशनल कांफ्रेंस के सत्ता आने के साथ ही पीडीपी व मुफ्ती मोहम्मद सईद और महबूबा मुफ्ती की हैसियत घट गई। उनकी नीतियों से जम्मू-कश्मीर की जनता भी असहमत हुई है और उफान की राजनीति से तौबा करने लगी है। पीडीपी का आधार सीमावर्ती भूभाग तक ही सिमट कर रह गया है। भारतीय सत्ता ने कश्मीर की समस्या के लिए जो मैप तैयार किया है और जिस नीति पर चलकर भारतीय सत्ता घाटी के लोगों का विश्वास जीतना चाहती है, उसमें भी पीडीपी की निर्णायक भूमिका नहीं है।

घाटी की समस्या का समाधान करने के लिए वातावरण तैयार करने और सलाह देने के लिए नियुक्त वार्ताकार जम्मू-कश्मीर की संपूर्ण राजनीतिक-सामाजिक प्रक्रिया को कसौटी पर रखकर चल रहे हैं। इस कारण जम्मू-कश्मीर में सकारात्मक वातावरण भी तैयार हुआ है। ऐसे में पीडीपी खुद को राजनीतिक रूप से अलग-थलग मान रही है और वह इस नीति पल चल पड़ी है कि कश्मीर पर कोई भी निर्णय लेने के पहले पीडीपी की अहमियत स्वीकार की जाए तथा उसकी राजनीतिक शक्ति को सम्मान दिया जाए। फारुख अब्दुल्ला परिवार के प्रति जम्मू-कश्मीर की जनता विशेष लगाव रखती है। फारुख अब्दुल्ला के बाद उनके बेटे उमर अब्दुल्ला ने राज्य के अन्य राजनीतिक दलों की शक्तिविहीन करने और उन्हें आवाम की ताकत से अलग करने में भूमिका निभाई है। हालांकि राज्य के अन्य राजनीतिक दलों को कमजोर करने के लिए उमर अब्दुल्ला भी अपने बयानों व नीतियों में राष्ट्र की संप्रभुता के प्रतिकूल प्रक्रिया चलाते रहे हैं। पत्थरबाजी के पीछे भी पीडीपी का हाथ था। पत्थरबाजी में पीडीपी के कई पार्टी पदाधिकारी गिरफ्तार हुए हैं, पर यह सही है कि मुफ्ती मोहम्मद सईद और महबूबा यह कहते रहे हैं कि उन्होंने पत्थरबाजी को हवा नहीं दिए हैं। पत्थरबाजी आतंकवादी संगठनों की एक खूनी और उफान वाली राजनीतिक साजिश थी। इस साजिश की नींव भी आयातित थी। बेशक आइएसआइ ने घाटी में पत्थरबाजी को हथियार बनाया था।

आइएसआइ के मंसूबों को पूरा करने में पीडीपी की ताकत लगी हुई थी। पत्थरबाजी ने घाटी में कैसे हालात पैदा किए थे, यह भी जगजाहिर है। इसके लिए आतंकवादी संगठनों ने हथियार की जगह करेंसी खर्च किए थे। करोड़ों रुपये बांटकर पत्थरबाजी को खतरनाक स्थिति में पहुंचाया और भारतीय सत्ता पर आरोप मढे़ गए। कहा गया कि घाटी में भारतीय सेना निर्दोष जनता का खून बहा रही है, जबकि असलियत यह थी कि भारतीय सेना ने कठिन परिस्थितियों में भी पत्थरबाजों से धैर्य और अहिंसक ढंग से काम लिया था। फिर भी भारतीय सेना को बदनाम करने के लिए राजनीतिक साजिश रची गई। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत और भारतीय सेना की छवि खराब की गई। मुस्लिम देशों के संगठनों ने कश्मीर में भारतीय सेना को मुस्लिम समुदाय का संहार करने जैसे आरोप भी लगाए। इसका परिणाम यह हुआ कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिथ्या प्रचारों से भारतीय सत्ता प्रभावित हो गई और आतंकवादी संगठनों के नापाक मंसूबों के जाल में फंस गई। बहरहाल, आइएसआइ और पाकिस्तान की पूरी कूटनीति और मंसूबों को समझा जाना चाहिए।

भारत और पाकिस्तान के बीच संपूर्ण वार्ता का दौर जारी है। अटकी हुई वार्ताएं फिर से शुरू हो चुकी हैं। भारत और पाकिस्तान के विदेश सचिव संपूर्ण वार्ता का एक पड़ाव हाल ही में तय कर चुके हैं। आइएसआइ की चाल यह हो सकती है कि वार्ता में भारत का पक्ष कमजोर करने और भारत की कूटनीतिक घेरेबंदी के लिए कश्मीर में भारत विरोधी भावनाएं भड़काई जाएं। ऐसा राजनीतिक माहौल बनाया जाए कि आवाम को लगे कि कश्मीर भारत का हिस्सा नहीं है। इससे पाकिस्तान के पक्ष को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समर्थन मिलेगा। विडंबना है कि भारतीय लोकतंत्र की खूबियों के चलते सत्ता की मलाई खा चुकी पीडीपी पाकिस्तान और आइएसआइ के सुर में सुर मिला रही है। चीन और पाकिस्तान की जुगलबंदी से हमारी संप्रभुता लहूलुहान होती रही है। 1962 में चीन ने हमला कर हमारी लाखों एकड़ भूमि हथिया ली है। पाकिस्तान ने गुलाम कश्मीर का एक बड़ा भूभाग चीन को सौंप दिया है। पीडीपी की इस राजनीतिक साजिश से चीन और पाकिस्तान की खुशी ही बढ़ी होगी। भारतीय सत्ता को पीडीपी जैसे राष्ट्रविरोधी दलों और तत्वों का दमन करना होगा।

(लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं)

(Courtesy : दैनिक जागरण, राष्ट्रीय संस्करण, 17 फरवरी 2011)

Friday, December 31, 2010

AFSPA is a must for functioning of security forces : Army


Udhampur: Ahead of the Cabinet Committee on security meet to discuss the proposal of amendment to the controversial AFSPA, a senior army officer today said the act is a "must" for the functioning of security forces in Jammu and Kashmir. 

"AFSPA is a must as far as functioning of the security forces is concerned and that is my stand," General Officer Commanding in Chief (GOC-in-C), Northern Command Lt Gen B S Jaswal told reporters in reply to a question about army's stand on Armed Forces Special Powers Act.

"I had time and again spoken on this issue. Our Chief has spoken on it and also Ministry of Defence has spoken on it and cleared their stand," he said. Referring to the security situation in the state, he said, "The internal and external situations on the borders is under control". "As far as the internal security is concerned, a dynamic situation emerged in the North of Pir Panchal and that is what I called agitation terrorism", he said.

 (Courtesy : www.indianexpress.com)