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Saturday, April 7, 2012

गलतफहमी में न रहें आतंकी


जम्मू। श्रीनगर स्थित सेना की 15वीं कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन ने शुक्रवार को कहा कि सीमा पार बैठे आतंकी इस गलतफहमी में न रहें कि वे हथियारों के साथ जिंदा नियंत्रण रेखा पार कर सकते हैं। अगर ऐसा किया तो मारे जाओगे। अलबत्ता, मुख्यधारा में लौटने की चाह में आने वाले युवकों कोसम्मानजनक जिंदगी जीने में पूरी मदद की जाएगी, बशर्ते वे राज्य व केंद्र सरकार द्वारा घोषित नीति के तहत औपचारिकताएं पूरी कर निर्धारित रास्तों से ही आएं। उन्होंने आने वाले समय में सीमा पार से घुसपैठ के प्रयासों में तेजी की आशंका भी जताई। हसनैन हंदवाड़ा के करमहूरा जंगल में मुठभेड़स्थल का दौरा करने के बाद पत्रकारों के सवालों का जवाब दे रहे थे।
बता दें कि गत दिवस यहां हुई मुठभेड़ में पांच आतंकी मारे गए थे। बीते दस दिनों में हंदवाड़ा में लश्कर के दस आतंकी मारे गए हैं। हसनैन ने बताया कि मारे गए पांच आतंकी नए नहीं थे, वे हंदवाड़ा और उसके साथ सटे इलाकों में कई महीनों से सक्रिय थे। हो सकता है ये आतंकी नियंत्रण रेखा पर घुसपैठियों के एक नए दल को लेने जा रहे हों। फिलहाल, मुठभेड़स्थल से मिले दस्तावेजों की जांच की जा रही है। घुसपैठ के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि आने वाले समय में सीमा पार से घुसपैठ के प्रयासों में तेजी आ सकती है। पहाड़ों पर बर्फ भी पिघलने लगी है। वैसे भी जम्मू-कश्मीर में सक्रिय अधिकांश प्रमुख कमांडर मारे जा चुके हैं और मरनासन आतंकवाद को जिंदा रखने के लिए गुलाम कश्मीर में बैठे आतंकी सरगना ज्यादा से ज्यादा आतंकियों को इस तरफ धकेलने का प्रयास करेंगे।
अलबत्ता, हमारे जवान घुसपैठ के हर प्रयास को नाकाम बनाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने आतंकरोधी अभियानों में मिल रही सफलता को विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों और खुफिया संस्थाओं के बीच आपसी समन्वय व आम लोगों के सहयोग का नतीजा करार दिया। आतंकियों के पुनर्वास और सरेंडर के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि हम शुरू से ही गुमराह युवकों की मुख्यधारा में वापसी के प्रयासरत हैं। सेना निर्धारित नियमों के मुताबिक काम करती है। (7/4/2012)

शहीदों को याद कर स्थापना दिवस मनायाक


जम्मू। भारतीय वायुसेना की 130 हेलीकॉप्टर यूनिट ने शुक्रवार को शहीदों को याद कर स्थापना दिवस मनाया। वायु सीमा की रक्षा करने के साथ ही यह यूनिट पिछले 24 साल से राज्य में प्राकृतिक आपदाओं व सड़क दुर्घटनाओं में घायल लोगों की जान बचाने में भी योगदान दे रही है। यह यूनिट लद्दाख में तैनात सेना की लाइफ लाइन भी कही जाती है। जम्मू एयरफोर्स स्टेशन में अधिकारियों व वायुसैनिकों ने सर्वोच्च बलिदान देने वाले अपने वीरों को श्रद्धासुमन अर्पित किया। साथ ही प्रण लिया कि मातृभूमि की रक्षा के लिए किसी भी प्रकार की कुर्बानी देने से वे पीछे नहीं हटेंगे। शहीदी स्मारक पर शहीदों को पुष्प चक्र चढ़ाए गए।
गौरतलब है कि कांडोर्स यूनिट के नाम से प्रसिद्ध 130 हेलीकॉप्टर यूनिट का गठन छह अप्रैल 1988 को जम्मू एयरफोर्स स्टेशन में हुआ था। जम्मू क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा का जिम्मा संभाल रही इस यूनिट ने युद्ध के मैदान के साथ राहत अभियान चलाने में भी अपना लोहा मनवाया है। हाल ही में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने राहत अभियान चलाकर लोगों की जान बचाने में इस यूनिट के योगदान की विशेष सराहना की थी। (7/4/2012)

Saturday, February 25, 2012

बर्फीले तूफान से एलओसी पर बाड़ को नुकसान


श्रीनगर। कश्मीर घाटी में नियंत्रण रेखा के पास बाड़बंदी बर्फीले तूफान से व्यापक रूप से क्षतिग्रस्त हुई है। सेना ने आज कहा कि इसके परिणामस्वरूप घुसपैठ रोकने के तंत्र के लिए नई चुनौती खड़ी हो गयी है। सेना ताजा बर्फीले तूफान की आशंका के चलते नियंत्रण रेखा के समीप कुछ चौकियों को खाली करने की संभावना पर विचार कर रही है।

उत्तरी कमान के लेफ्टीनेंट जनरल के.टी. परनायक ने यहां संवाददाताओं को बताया कि कई क्षेत्रों में बाड़बंदी को व्यापक नुकसान हुआ है विशेषकर शम्सबारी (पर्वतीय) रेंज में नियंत्रण रेखा के पास घुसपैठ रोकने के उपायों के तहत 2004 में बाड़ लगायी गयी थी। यह घुसपैठ रोकने के सेना के प्रयासों में काफी महत्वपूर्ण साबित हुई है।

लेफ्टीनेंट जनरल परनायक ने बताया कि क्षेत्र में इस कदर बर्फ है कि उसमें बाड़ तक ढंक गयी है। उन्होंने कहा, ‘‘यह एक सालाना ढर्रा है लेकिन इस बार बर्फ काफी अधिक है। बाड़ क्षतिग्रस्त हो गयी है। वास्तव में इस कदर बर्फ है कि बाड़ उसके नीचे दब गयी है।”

बांदीपोरा जिले में 22 फरवरी को नियंत्रण रेखा के समीप गुरेज सेक्टर में द्वार क्षेत्र में स्थित 109 इंफेंट्री ब्रिगेड के मुख्यालय भारी बर्फीले तूफान की चपेट में आ गया। इसके परिणामस्वरूप 14 सैनिकों की मौत हो गयी जबकि दो अभी तक लापता हैं। इसी दिन गंदेरबल जिले के सोनमर्ग क्षेत्र में सेना के एक शिविर के बर्फीले तूफान की चपेट में आने से तीन और सैनिकों की जान चली गयी।

लेफ्टीनेंट जनरल परनायक के कहा कि बर्फ के पिघलने और गर्मी शुरू होने के बाद सेना को बाड़ को निकालने और उसकी मरम्मत के लिए एक बड़े काम को अंजाम देना होगा। उन्होंने कहा, ‘‘हमें उम्मीद है कि इसे समय पर किया जायेगा।”

Thursday, November 10, 2011

अफस्पा खत्म करने के हालात नहीं


जम्मू। आतंकवाद का सामना कर रहे जम्मू-कश्मीर में अभी सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून (अफस्पा) खत्म करने लायक हालात नहीं हैं। सेना ने यह पक्ष बुधवार शाम मुख्यमंत्री आवास पर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की अध्यक्षता में हुई यूनिफाइड हेडक्वार्टर की बैठक में रखा। सेना ने कहा कि राज्य में आतंकवाद का ढांचा बरकरार है। कहीं कम या ज्यादा होना कोई मायने नहीं रखता। इस मसले पर तीन घंटे तक गहन मंथन हुआ। बाद में फैसला हुआ कि इस मुद्दे पर बातचीत अभी जारी रहेगी। मुख्यमंत्री इस बात पर अड़े हुए थे कि कई जिलों में विशेषाधिकार खत्म करने लायक हालात बन गए हैं। मुख्यमंत्री ने इस मसले पर सेना के साथ पुलिस, खुफिया एजेंसियों की राय भी ली। इसके साथ राज्य के मौजूदा सुरक्षा हालात, कानून एवं व्यवस्था के मसलों पर भी चर्चा हुई। सहयोगी पार्टी कांग्रेस भी एतराज जता चुकी है कि सीएम ने यूनिफाइड हेडक्वार्टर की बैठक में इस मुद्दे पर विचार करने से पहले ही श्रीनगर व बडगाम से अफस्पा हटाने की घोषणा कर दी। बैठक में उप मुख्यमंत्री ताराचंद, गृह राज्यमंत्री नसीर असलम वानी, चीफ सेक्रेटरी माधव लाल, गृह सचिव बीआर शर्मा, सेना की उत्तरी कमान के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल केटी परनायक, पंद्रह कोर के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल हसनैन, 16 कोर के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल एएस नंदाल, 9 कोर के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल एके चौधरी, डीजीपी कुलदीप खुड्डा, एडिशनल डीजी के राजेन्द्रा, बीएसएफ, सीआरपी के आईजी व खुफिया एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।

Friday, October 7, 2011

पीओके में चीनी सैनिक


नई दिल्ली, 6 अक्टूबर। पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) में चीनी सैनिकों की संख्या और मौजूदगी की शीर्ष सैन्य नेतृत्व ने पुष्टि कर दी है। सेना प्रमुख जनरल वीके सिंह के मुताबिक पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर में करीब चार हजार चीनी मौजूद हैं। इनमें चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी के सैनिक भी हैं। पीओके में चीनी मौजूदगी न केवल पाकिस्तान और चीन की नापाक साझेदारी का सुबूत है, बल्कि भारत के लिए चिंता का सबब भी। जनरल सिंह ने कहा कि पीओके में चीन की कई कंस्ट्रक्शन टीमें काम कर रही हैं। ऐसे करीब तीन से चार हजार लोग हैं जिनमें कई सुरक्षा कारणों से हैं। इनमें कई इंजीनियर टुकडि़यां भी हैं। 
फील्ड मार्शल केएम करियप्पा स्मृति व्याख्यान कार्यक्रम के बाद सेनाध्यक्ष पाक अधिकृत कश्मीर में चीनी सैनिकों की मौजूदगी के सवालों के जवाब दे रहे थे। इससे पहले वायुसेना प्रमुख एनएके ब्राउनी भी कह चुके हैं कि पाक अधिकृत कश्मीर में चीनी सैनिकों की मौजूदगी ने भारत का ध्यान खींचा है। अप्रैल 2011 में उत्तरी कमान के तत्कालीन प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल केटी परनायक ने कहा था कि गिलगिट और बाल्टिस्तान क्षेत्र में चीनी सैनिकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया था पाक-चीन गठजोड़ भारत और पाक के बीच किसी संघर्ष की सूरत में भारतीय सुरक्षा हितों को प्रभावित करेगा। सूत्रों के मुताबिक जब भी भारत ने चीन के साथ मामला उठाया है तो उसे जवाब दिया गया कि बीजिंग पाकिस्तान की स्थिरता के लिए मदद करने की इच्छा से वहां है। भारतीय खेमा मानता है कि चीनी सैनिकों को किसी भी सूरत में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में रहने का हक नहीं है। अगस्त, 2010 में पाक अधिकृत कश्मीर में चीनी सैनिकों की मौजूदगी के बाबत अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय मीडिया में आई खबरों के बाद सरकार ने कहा था कि भारत इन सूचनाओं की पड़ताल कर तथ्यों की पुष्टि कर रहा है।

Tuesday, July 26, 2011

छद्म युद्ध जारी रहा तो संभव है एक और कारगिल

श्रीनगर। कारगिल घुसपैठ को खुफिया विफलता के रूप में स्वीकार करते हुए पूर्व सेना प्रमुख जनरल (से.नि.) वी.पी. मलिक ने मंगलवार को कहा कि जब तक पाकिस्तान, भारत के खिलाफ छद्म युद्ध जारी रखता है तब तक 1999 तरह के हमलों की पुनरावृति को नहीं रोका जा सकता है।
कारगिल युद्ध के दौरान सेना प्रमुख रहे मलिक ने संवाददाताओं से कहा कि अब तक पाकिस्तानी सेना ने छद्म युद्ध के एजेंडे को नहीं छोड़ा है। जब तक छद्म युद्ध जारी रहता है, आप नहीं कह सकते कि कारगिल जैसा युद्ध नहीं होगा।
आपरेशन विजय की 12वीं वर्षगांठ कार्यक्रम में हिस्सा लेने आए मलिक ने कहा कि सेना और अन्य सुरक्षा बलों को सतर्क रहने की जरूरत है ताकि एक और कारगिल नहीं हो।
उन्होंने कहा कि हमें सतर्क रहने की जरूरत है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि अगर पाकिस्तान की ओर से ऐसा कोई प्रयास होता भी है तो हम इसके लिए तैयार हैं। जनरल मलिक ने कहा कि सैन्य और असैनिक खुफिया विफलता, निगरानी की कमी के कारण पाकिस्तान कारगिल अभियान को अंजाम दे पाया।
मलिक ने कहा कि हां, हम आश्चर्यचकित रह गए। इसके लिए मैं सैन्य खुफिया और असैन्य खुफिया तथा निगरानी की कमी को जिम्मेदार मानता हूं।
पूर्व सेना प्रमुख ने कहा कि कारगिल घुसपैठ से सेना हतप्रभ थी क्योंकि उसे पहले लग रहा था कि यह आतंकियों की घुसपैठ है, लेकिन समय गुजरने के साथ हमें महसूस हुआ कि यह नियंत्रण रेखा के पार से गोलीबारी की आड़ में पाकिस्तानी सेना की करतूत थी। जनरल मलिक ने कहा कि आज सेना रडार, मानवरहित विमान, उपग्रह समेत बेहतर साजो सामान से लैस है जो कारगिल युद्ध के बाद पेश हुए हैं। उन्होंने कहा कि निगरानी तंत्र को बेहतर बनाने के अलावा खुफिया सेवा भी बेहतर हुई है। (दैनिक जागरण, 26.07.2011)

Tuesday, May 17, 2011

Army vetoes Omar Abdullah, says AFSPA needed

15 May 2011

Srinagar : The army has vetoed Omar Abdullah government’s plan of reviewing the controversial Armed Forces Special Powers Act (AFSPA) in Jammu and Kashmir saying the law was necessary until the terrorist infrastructure was dismantled across the Line of Control (LoC).

Lt General KT Parnaik, general officer commanding in chief Northern Command, said army has submitted its recommendations to the chief minister listing why AFSPA was necessary in J&K.

“Obviously the recommendation was that the time is not rife for removal of AFSPA. This was not the single recommendation but there were host of issues which we have spelled out. We have tried to clarify why AFSPA is required in J&K in the larger interest of security. We perceive that unless terrorist infrastructure is dismantled across the LoC, you can’t have sense of lasting peace”, said Lt Gen Parnaik.

The Northern Army Commander said the recommendations were made by two core committees formed by the chef minister Omar Abdullah to look into the issue.

“Both committees met in February-March and gave recommendations to chief minister and thereafter we have not heard (from the government) on this issue”, he said. On September 29, the J&K government had constituted two committees comprising senior civil and security officers who will carry out a detailed review and submit their recommendation to the apex committee.

On March 5, Omar told Legislative Assembly said he was in favor of removing those areas from the ambit of Disturbed Areas Act (DAA), where the situation has improved and there is no requirement of AFSPA. “If situation remains peaceful the Government will remove many areas out of DAA list this year”, he had said.

With army making its intentions clear, Omar government is facing a tricky situation how to pacify opposition PDP and separatists who have been gunning for his head over the AFSPA issue.

On the possibility of Pakistan’s upping the ante on militancy front in the aftermath of Osama episode, Lt Gen Parnaik said it was quite likely that Pakistan may push in more people into J&K so that attention gets diverted from internal problems to external areas.

“It is quietly likely that Pakistan under pressure because of so many questions being asked to them, could adopt strategy of diverting attentions which they always done. One of the ways is to push in more people into J&K. It is apossibility we have to wait and see”, he said. Lt Gen Parnaik said Chinese presence in the neighborhood in PoK is a cause of concern.

(Courtesy : www.dnaindia.com)

Tuesday, May 10, 2011

Terrorist camps operating in Pakistan-held Kashmir: Indian Army

Srinagar, 09 May 2011

Guerrilla training camps are still active across the Line of Control (LOC) in the Pakistan-administered part of Jammu and Kashmir, the Indian Army said in Srinagar on Monday. "Militant training camps are still active across the LOC," Major General Ravi Thodge, general-officer-commanding of the count er-insurgency Kilo Force in the Valley, told reporters in Handwara in north Kashmir's Kupwara district, some 85 km from in Srinagar.

"The militants can try to sneak into the Valley in small groups this summer, but our troops are vigilant to defeat any such infiltration bid," he added. A huge cache of arms and ammunition along with other logistic support equipment were displayed at the press conference. The arms and ammunition were seized by personnel of the 6 Rashtriya Rifles and Jammu and Kashmir Police in the dense Haphruda forests in Kupwara, Thodge said.

Eight AK-56 rifles, four AK-47 rifles, one under barrel grenade launcher (UBGL), eight UBGL grenades, 694 rounds of AK ammunition, 40 grenades, one radio set with antenna, 20 remote-control improvised explosive device (IED) boxes and 15 electric detonators, among other ammunition and equipment, have been recovered. "This is a major haul of arms and ammunition recovered in the recent past and the recovery has thwarted the evil designs of terrorists in north Kashmir," Thodge added.

(Courtesy : www.hindustantimes.com)