मुंबई. भारत की अर्थव्यवस्था को नकली नोट के जरिए कमजोर करने पर तुले पाकिस्तान के नापाक मंसूबे एक बार फिर उजागर हो गए हैं। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) से जुड़े सूत्रों के हवाले से आई खबरों के मुताबिक एनआईए को इस बात के सुबूत हाथ लगे हैं कि भारत में मौजूद जाली नोटों की छपाई पाकिस्तान में हो रही है।
सूत्रों के मुताबिक जांचकर्ताओं ने जब्त किए गए जाली नोट और पाकिस्तान के असली नोट को एक विशेषज्ञ समिति के पास भेजा था। कमिटी ने इस बात की जांच कि दोनों नोटों की छपाई में क्या समानता है। सेक्योरिटी प्रिटिंग एंड मिंटिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि नोट की जांच के बाद यह बात सामने आई है कि जाली भारतीय मुद्रा पाकिस्तानी प्रेस में ही छापी गई है।
विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट के मुताबिक नकली भारतीय नोट और पाकिस्तानी नोटों की छपाई में 'ड्राई ऑफसेट प्रिंटिंग' पद्धति का इस्तेमाल किया गया है। दिलचस्प यह है कि पांच सौ और एक हजार रुपये मूल्य के नकली भारतीय नोटों पर मिला पीएच वैल्यू पाकिस्तानी नोटों पर मिले पीएच वैल्यू के बराबर है।
भारतीय नकली नोट और पाकिस्तानी नोट पर मिले 'ग्राम पर स्क्वायर (जीएसएम)' भी समान हैं। जीएसएम किसी कागज की प्रकृति का संकेतक है। भारतीय और पाकिस्तानी नोट का एस जैसा जीएसएम इस बात का संकेत है कि दोनों कागजों का स्रोत एक है।
'और निगरानी की जरूरत'
सामरिक मामलों के विशेषज्ञ और रणनीतिकार सुशांत सरीन कहते हैं कि नकली नोटों की खेप भेजना पड़ोसी मुल्क की भारत के खिलाफ 'जंग' है। दैनिकभास्कर डॉट कॉम से बातचीत में सरीन ने कहा कि नकली नोट भेजना दुश्मन की रणनीति का ही एक हिस्सा है। उन्होंने कहा, 'देश में नकली नोटों की भरमार के पीछे कई वजहें हैं जिन्हें सरकार संजीदगी से नहीं रही है। देश में तेजी से फल फूल रहा हवाला कारोबार, सीमाओं पर चौकसी में कमी आदि कुछ ऐसी वजहें हैं जिसकी वजह से नकली नोटों पर काबू पाना मुमकिन नहीं हो रहा है।'
सरीन ने देश में नकली नोटों की बढ़ती खेप को लेकर सरकार को और अधिक सतर्क रहने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा कि एक ओर तो भारत दुनिया में उभरती बड़ी ताकतों की कतार में खड़ा होने का दावा करता है लेकिन दूसरी ही तरफ वह नेपाल पर किसी तरह का शिकंजा कसने या निगरानी रखने में नाकाम रहा है। हालांकि नेपाल से भारत के मधुर संबंध हैं लेकिन पाकिस्तान से सबसे अधिक नकली नोटों की खेप भी इसी देश के जरिये आती है।
(दैनिक भास्कर, 21 जुलाई 2011)
कश्मीर : अमेरिकी नीति बदलने के लिए आईएसआई ने बहाए करोड़ों
वाशिंगटन/नई दिल्ली/श्रीनगर. पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई कश्मीर मामले पर अमेरिका की नीति बदलने के लिए करोड़ों रुपए बहा रही है। उसके एक एजेंट की गिरफ्तारी से यह खुलासा हुआ है। वह अवैध तरीके से भारत विरोधी लॉबिंग करने में जुटा था। आईएसआई इसके लिए उसे अब तक 40 लाख डॉलर (लगभग 17.70 करोड़ रुपए) की धनराशि दे चुकी थी।
अमेरिकी एजेंसी एफबीआई ने कश्मीरी मूल के अमेरिकी नागरिक गुलाम नबी फाई को मंगलवार को गिरफ्तार किया। उसे वर्जीनिया में फेयर फैक्स स्थित निवास से पकड़ा गया। 62 वर्षीय फाई वाशिंगटन स्थित गैर सरकारी संगठन कश्मीरी-अमेरिकन काउंसिल (केएसी) का डायरेक्टर है। यह संगठन ‘कश्मीर के आत्म निर्णय के अधिकार’ के लिए लॉबिंग करता है। फाई मूल रूप से मध्य कश्मीर के बडगाम का है। वह 1980 के दशक की शुरुआत में देश छोड़कर चला गया था। फाई के अलावा एक अन्य अमेरिकी नागरिक जहीर अहमद को भी गिरफ्तार किया गया है। फाई को गिरफ्तार करने के बाद उसे कोर्ट में पेश किया गया। अगर उस पर लगे आरोप सिद्ध हो जाते हैं तो उसे पांच साल तक की कैद हो सकती है।
4 पाकिस्तानी हैंडलर्स : एफबीआई ने आईएसआई के ऐसे चार अधिकारियों के नाम, फोन नंबर और ईमेल सार्वजनिक किए हैं जो फाई के हैंडलर्स थे। इनके नाम अब्दुल्ला, जावेद अजीज खान उर्फ राठौर, अब्दुल्ला उर्फ निजामी मीर और तौकीर मेहमूद भट्ट उर्फ सोहेल महमूद हैं। इनमें से ब्रिगेडियर अब्दुल्ला पर कश्मीर मामले को संभालने की जिम्मेदारी थी।
तीन साल में चार हजार बार संपर्क : एफबीआई की ओर से कोर्ट में पेश किए हलफनामे से पता चलता है कि फाई अपने पाकिस्तानी हैंडलर्स से लगातार संपर्क में रहता था। उसने जून 2008 से लेकर गिरफ्तार होने तक अपने इन हैंडलर्स से 4000 से अधिक बार संपर्क किया। वहीं 2006 से 2011 की शुरुआत तक जावेद अजीज खान ने उससे करीब 2000 बार संपर्क किया।
यह थी योजना : छानबीन के दौरान एफबीआई को कश्मीरी-अमेरिकन काउंसिल से जुड़े वर्ष 1999 के रणनीतिक दस्तावेज मिले। वर्ष 2000, 2001, 2005 और 2006 के भी इसी तरह के दस्तावेज मिले। इन दस्तावेजों से कश्मीरी-अमेरिकन काउंसिल की योजना का पता चलता है। जैसे कि एक्जीक्यूटिव ब्रांच अधिकारियों को जानकारी मुहैया कराना, कश्मीर मामले को उठाने के लिए कांग्रेस का इस्तेमाल करना, भारतीय लॉबी को बेदखल करना और अमेरिकी प्रशासन व भारत सरकार पर राजनीतिक दबाव बनाना।
भारत में भी कई मामलों में नाम
जम्मू-कश्मीर के डीजीपी कुलदीप खोड़ा ने बताया कि राज्य में कई मामलों में फाई का नाम सामने आता रहा है। जैसे कि आईएसआई से मिली धनराशि को भारत विरोधी गतिविधियों में लगाना। विशेषकर जम्मू-कश्मीर में।
अलगाववादी बिफरे
फाई की गिरफ्तारी ने कश्मीरी अलगाववादी नेताओं को विरोध का एक और मौका दे दिया। हुर्रियत नेता अली शाह गिलानी ने कहा कि फाई को भारत के इशारे पर गिरफ्तार किया गया है। ताकि कूटनीतिक स्तर पर कश्मीर के आंदोलन को कमजोर किया जा सके।
(दैनिक भास्कर, 21 जुलाई 2011)
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