Friday, October 7, 2011

उमर के बाद फारूक अब्दुल्ला की घेरेबंदी


श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के बाद उनके पिता और केंद्रीय मंत्री फारूक अब्दुल्ला भी पैसा लेकर विधायक बनाने के मामले में घिर गए हैं। पिता-पुत्र भले ही यूसुफ की पुलिस हिरासत में मौत व पार्टी नेताओं से रिश्वत लेने के आरोपों को बेबुनियाद बता रहे हैं, लेकिन यूसुफ को धन देने वाले नेकां नेता अब्दुल सलाम रेशी का कहना है उसने पैसा फारूक की जानकारी में दिया था। रेशी ने दावा किया कि यूसुफ को सीएम आवास में कमरे में बंद करके मारा गया था। आइजी (क्राइम) ने मुझसे कहा कि मैं यह बयान दूं कि यूसुफ को पैसा एमएलसी बनने के लिए नहीं कुछ लोगों को नौकरी दिलाने के लिए दिया था। वहीं, फारूक का कहना है कि उन्होंने किसी से भी पैसे नहीं लिए। न ही कोई पैसा देकर एमएलए या एमएलसी बना है। अब्दुल सलाम रेशी ने गुरुवार को दैनिक जागरण से बातचीत में कहा, मैने एमएलसी बनने लिए यूसुफ को फरवरी में पार्टी फंड के नाम पर 34 लाख रुपये दिए थे। फारूक अब्दुल्ला को लेनदेन की पूरी जानकारी थी। उन्होंने एमएलसी के साथ- साथ राज्यमंत्री बनाने के लिए एक करोड़ और सिर्फ एमएलसी बनाने के लिए 50 लाख मांगे थे। पैसा लेते वक्त कहा गया था कि अप्रैल में एमएलसी चुनाव में उसे पार्टी प्रत्याशी बनाकर जिताया जाएगा। वादा पूरा न होने पर मैंने पैसे वापस मांगे तो यूसुफ ने टेली कांफ्रेंसिंग से अब्दुल्ला से बात कराई। उन्होंने कहा, कुछ कारणों इस बार तुम्हे एमएलसी नहीं बना पाया, जल्द ही एडजस्ट कर दूंगा। 50 लाख शेख नजीर को दे दो पर मेरे पास इतने पैसे नहीं थे। एक सवाल के जवाब में रेशी ने कहा, मैंने मुख्यमंत्री उमर से शिकायत 29 सिंतबर को नहीं तकरीबन ढाई माह पहले की थी। अलबत्ता, 30 सितंबर को मुझे सीएम के निजी सचिव ने फोन किया और साढ़े तीन बजे तक सीएम निवास पहुंचने को कहा। मैं वहां पहुंचा तो यूसुफ भट्ट गांदरबली पहले से ही बैठा था। गांदरबली ने बताया कि एमएलसी के साथ-साथ राज्यमंत्री बनने के लिए मैने यूसुफ को 85 लाख रुपये दिए थे। करीब सवा चार बजे मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और देवेंद्र राणा आए। कुछ देर बाद गृह राज्यमंत्री नासिर असलम वानी और यूसुफ आए। कुछ देर बाद हम तीनों को उमर ने बुलाया और यूसुफ से पूछा, वह गांदरबली के पैसे कब लौटाएगा तो उसने कहा कि दस-पंद्रह दिनों में। उमर ने कहा, अभी क्यों नहीं तो उसने कहा कि मुझे अकेले में बात करनी है। मुख्यमंत्री ने इंकार करने के साथ कहा, क्राइम ब्रांच को मामला सौंप दिया तो मुश्किल हो जाएगी। इस पर यूसुफ ने कहा, अगर आप चाहें तो फारूक अब्दुल्ला को दिल्ली से आने दें,उसके बाद हर चीज साफ हो जाएगी। इसके बाद उमर उसे एक कमरे में ले गए। पीएसओ भी पीछे से गया। आधे घंटे तक सीएम व उनके साथियों ने बात की। इसी दौरान आइजीपी क्राइम कमरे में गए। इसके बाद हमें क्राइम ब्रांच मुख्यालय ले जाया जाने लगा तो मैने जिप्सी में यूसुफ को पड़े देखा। उसकी हालत खराब थी और वह बोल नहीं पा रहा था। क्राइम ब्रांच पहुंचने पर दो आदमी उसे सहारा देकर अंदर ले गए थे। वहां वह एक बिस्तर पर गिर पड़ा। रेशी ने दावा किया कि यूसुफ कई राज जानता था। उसकी जुबान बंद करने के लिए ही उसे प्रताडि़त किया गया, जिससे उसकी मौत हो गई। अब मुझे पैसों की नहीं जान की चिंता है। फारूक ने पार्टी विधायकों व वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक के बाद कहा, यूसुफ की मौत की न्यायिक जांच के आदेश जारी कर दिए गए हैं। सच सामने आ जाएगा। पीडीपी द्वारा उमर व उनके इस्तीफे की मांग पर उन्होंने कहा, यह पीडीपी का राजनीतिक स्टंट है।

उमर अब्दुल्ला ने ठुकराई इस्तीफे की मांग
नई दिल्ली। पार्टी कार्यकर्ता की हिरासत में मौत के मामले को लेकर मुश्किलों में घिरे जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस मामले को लेकर विपक्षी दल पीडीपी द्वारा की गई इस्तीफे की मांग बृहस्पतिवार को खाजिर कर दी। विपक्ष ने इस्तीफे की मांग करते हुए कहा था कि मुख्यमंत्री न्यायिक जांच को प्रभावित कर सकते हैं। पीडीपी की मांग के बारे में पूछे जाने पर उमर अब्दुल्ला ने कहा कि यह कैसे संभव है? जो न्यायाधीश मामले की जांच करेगा वह मेरी सरकार के प्रति जवाबदेह नहीं होगा। ऐसे में प्रभावित करने का सवाल कहां से पैदा हो गया? उन्होंने कहा कि इसके अलावा, यह मेरे और मेरी सरकार के लिए सबसे अच्छा है कि सच्चई और केवल सचाई सामने आनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके इस्तीफे की मांग कर रहे लोग देश की न्याय प्रणाली को कमजोर कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोगों का अदालतों पर काफी विश्वास है। इसलिए लाखों लोगों के भरोसे का मजाक मत उड़ाइए।

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